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Thursday, 3 December 2015

हँसता हुआ एक नूरानी चेहरा...!!!



पता नहीं क्यों आजकल मन भारी भारी सा लग  रहा है ...दिल बुझा बुझा सा रह रहा है....किसी काम में मन नहीं लग रहा है।ये बीमारी अभी इधर से ही लगी  है जब से मेरी कामवाली छुट्टी लेकर गांव गई है।ये भी कोई बात हुई की काम वाली के जाने से मेरा मन नहीं लगने लगा..  लेकिन ये सच है जब से वह गयी है मैं फ्रस्टेड  हो गयी हूँ क्योंकि वह जब आती थी तो  गेट खोलते ही खुशिओं का एक झोंका उसके साथ मेरे घर में घूस जाता था। उसके चहरे पे एक अजीब किस्म की ख़ुशी होती थी । उसको देखने से ऐसा लगता कि वो इतनी खुश है की मानो कि जैसे वह क्वीन विक्टोरिया  हो। सारे जहाँ की खुशी उसके ही चहरे पर।दुनिया भर के परेशानी से बेखबर एक हँसता हुआ एक नूरानी चेहरा लिए घर में दाखिल होती । मेरे चेहरे पर दिन के बारह बज रहे होते और उसके चेहरे पर ख़ुशी लबालब भरे होते जैसे इतना की सरक सरक के गिर रहे हों। मेरे पास हर भौतिक सुख के  बाबजूद दुनिया भर की समस्या तुर्की के दुआरा फ्रांस फ़ाईटर प्लेन को मार गिराना, मोदी जी का विदेश यात्रा ,देश में चल रहे राजनीति उथल पुथल पर घर में होती दिन रात बहस से थोबड़े लटके रहते पर इनके थोबड़े पर बिना खाए पिऐ, बिना क्रीम पाऊडर के चमक रहे होते और मेरा पार्लर जाना महगें क्रीम फेयर एंड लवली सब बर्बाद । इसके चहरे से निकलते पॉजिटिव एनर्जी से मैं अपने को चार्ज करती हूँ। इसलिए मुझे अपनी कामवाली के घर से आने का इंतजार है क्योंकि लगता है कि वह मेरा चार्जर बन गई है।