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Thursday, 31 December 2015




 नया साल आप सबको
 बहुत बहुत मुबारक हो !!!
 स्वास्थ्य दौलत प्रसिद्धि से 
 आपका जीवन भरा हो 
 उमंग उत्साह और खुशियां 
 आपके द्वार खड़ा  हो 
 ईर्ष्या द्वेश क्लेष 
 आप से दूर पड़ा हो 
 फूल आपके राहों में बिछें हो 
 सफलता के शिखर पर  
 आप सदा ही खड़ें हों 
 मेरी तरफ से आप सबको 
 नया साल मुबारक हो !!!


                                                  रंजना वर्मा 


                                                                          

Thursday, 3 December 2015

हँसता हुआ एक नूरानी चेहरा...!!!



पता नहीं क्यों आजकल मन भारी भारी सा लग  रहा है ...दिल बुझा बुझा सा रह रहा है....किसी काम में मन नहीं लग रहा है।ये बीमारी अभी इधर से ही लगी  है जब से मेरी कामवाली छुट्टी लेकर गांव गई है।ये भी कोई बात हुई की काम वाली के जाने से मेरा मन नहीं लगने लगा..  लेकिन ये सच है जब से वह गयी है मैं फ्रस्टेड  हो गयी हूँ क्योंकि वह जब आती थी तो  गेट खोलते ही खुशिओं का एक झोंका उसके साथ मेरे घर में घूस जाता था। उसके चहरे पे एक अजीब किस्म की ख़ुशी होती थी । उसको देखने से ऐसा लगता कि वो इतनी खुश है की मानो कि जैसे वह क्वीन विक्टोरिया  हो। सारे जहाँ की खुशी उसके ही चहरे पर।दुनिया भर के परेशानी से बेखबर एक हँसता हुआ एक नूरानी चेहरा लिए घर में दाखिल होती । मेरे चेहरे पर दिन के बारह बज रहे होते और उसके चेहरे पर ख़ुशी लबालब भरे होते जैसे इतना की सरक सरक के गिर रहे हों। मेरे पास हर भौतिक सुख के  बाबजूद दुनिया भर की समस्या तुर्की के दुआरा फ्रांस फ़ाईटर प्लेन को मार गिराना, मोदी जी का विदेश यात्रा ,देश में चल रहे राजनीति उथल पुथल पर घर में होती दिन रात बहस से थोबड़े लटके रहते पर इनके थोबड़े पर बिना खाए पिऐ, बिना क्रीम पाऊडर के चमक रहे होते और मेरा पार्लर जाना महगें क्रीम फेयर एंड लवली सब बर्बाद । इसके चहरे से निकलते पॉजिटिव एनर्जी से मैं अपने को चार्ज करती हूँ। इसलिए मुझे अपनी कामवाली के घर से आने का इंतजार है क्योंकि लगता है कि वह मेरा चार्जर बन गई है।   


Wednesday, 2 December 2015

"आगे बढ़ता रहे बिहार " ....!!!.



"आगे बढ़ता रहे बिहार " ......यह स्लोगन खूब हिट हो रहा है।कभी हम भी चाहते थे कि हमारा बिहार आगे बढे। हमने जब पटना में एक फ्लैट ख़रीदा था तो नाते रिश्तेदारों से काफी सुनना पड़ा था की पटना में तुझे क्या दिखा ...  न  तो वहां ढंग का रोड है, न  मॉल  है ,न कोई अच्छा सा होटल और भी सौ कमियां गिनाई उन्होंने .....  बाहर डेल्ही , बंगलौर वगैरह में क्यों नहीं   । मुझे भी बाद में लगने लगा कि  यहाँ घर खरीद कर हमने  कोई गलती तो नहीं कर दी ....चलो अब ले लिया तो ले लिया। इधर बहुत समय के बाद पटना जाना हुआ। जब हमारी गाड़ी खगोल होते हुए दानापुर  जगदेव  पथ पार  कर रही थी  तो मैं अचंभित हो रही थी कि ये  कौन सा शहर है .... ये पटना ही है क्या ....  आँखे विश्वास नहीं कर पा रही थी। रोड के दोनों ओर बड़े बड़े  मल्टीस्टोरी बिल्डिंग,बड़े बड़े शीशे वाले वोडाफोन,सोनी कंपनी के कॉरपोरेट ओफ़्फ़िसेस  ....  बड़े बड़े होटल देखने लायक हैं । साफ सुथरे हाइवेज  और दोनों तरफ सुन्दर ढंग से स्ट्रीट लाइट लगे हुए.....  ओवर ब्रिज का जाल सा फैला हुआ है।  बिहार का यह बदला रूप मेरे लिए अविश्वसनीय था।बहुत ख़ुशी हो रही है कि अपना बिहार आगे बढ़ रहा है  । अब लगता है कि हमने बिहार को आशियाना बनाकर बिलकुल सही काम किया ।