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पावन नगरी अयोध्या धाम,
आज घर आए भगवान।
आज धरा पे चरण पड़े हैं,
मर्यादा पुरुषोत्तम राम।
तीनों लोकों के नायक नाथ,
धरती पर आए भगवान
जय राम जय राम जय श्री राम।।
युग युग से इंतज़ार में जिनके
सत्य न्याय का विजय पताका।
आज धरा पर विराज रहें,
राम लला की प्राण - प्रतिष्ठा।
हुंकार हो रही चारो दिशा में,
आज घर आए भगवान।
जय राम जय राम जय श्री राम।।
सरयू तट का घाट घाट पे,
प्रभु चरण पखारने को।
कब से जोह रहा बाट बाट है,
राह में पलक बिछाए हैं।
थक गयी थी अँखियों की पलकें,
सांस सांस भी भारी थी।
सदियों से जो सपने सजाये,
आज उसी की बारी है।
गूंज रहा सहस्त्र शंखनाद,
देवलोक से आए भगवान
जय राम जय राम जय श्री राम।।
रंजना वर्मा
पटना

सुन्दर रचना
ReplyDeleteआपने अपनी पोस्ट में अयोध्या और रामलला के आगमन का जो चित्र खींचा, वह बहुत जीवंत लगा। हर पंक्ति में भक्ति और इंतज़ार की भावना साफ महसूस होती है। “सरयू तट का घाट घाट” वाला चित्र मुझे बहुत अच्छा लगा, क्योंकि उसमें अयोध्या की पूरी झलक दिखती है।
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