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Wednesday, 26 June 2013

यादें............

 अपनों की याद में वक़्त बे वक्त बरसती आखें .............
 अपनों को देखने वक़्त बे वक्त तरसती आखें .............
 जो चले गये इस जहाँ से उनकी याद
 दर्द बनकर हरदम भर आती आखें  .............
 छोड़ गये जो हमको वो लौट फिर नहीं आयेंगे 
 उनकी याद में नींद में भी बहती आखें ............. 
 वे हमें बहुत प्यारे थे 
 हम उनके जान से  दुलारे थे 
 क्या वे खुदा के भी प्यारे थे 
 क्यूँ खुदा उन्हें पास बुला लेते 
 जिन्हें देखने बार बार भर आती आंखे ............. 
 कई बार खुदा से मन्नत मांगी 
 उनका चेहरा दिखा दो चाहे एक दफा ही काफी 
 जिनकी याद में हरदम छलकती आंखे  .............
 आप हमारे आसपास अभी भी सदा रहते हो 
 आपके ही आशीर्वाद दुआ से होता है हमारा सबेरा
 आपके ही स्नेह से उज्ज्वल भविष्य हमारा 
 आपकी याद में हरदम रोती आखें   ............. 
 आप को देखने को हरदम तरसती आखें  .............  

                                                                          Ranjana Verma