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Friday, 5 April 2013

गरीबी !



कल रात मैं एक पार्टी में गयी थी ...... भव्य आयोजन !!
अंदर पंडाल में तरह तरह के ........ व्यंजन !
बुफे सिस्टम में खाए खिलाये जा रहे थे ....लोगों की काफी भीड़ थी
गेट के पास कुछ भिखारी कातर निगाहों से अंदर  देख रहे थे .....
वही गेट के बाहर भी कुछ भिखारी गड्डे में फेके गए
पत्तल को लेने के लिए आपस में झगड़ रहे थे ........
कुछ भिखारी बच्चे गेट में निकल रहे लोग से खाने को मांग रहे थे
ये द्र्ष्य देखकर मैं सोचने को मजबूर हो गयी !
इतनी असमानता क्यों है ...हमारे बीच ??
कहीं भरपेट से अधिक भोजन और दूसरी तरफ
अनाज के एक एक दाने को .......तरसते लोग !!
सच  कहा गया  है कि
गरीबी एक .......अभिशाप !!
इससे बड़ी नहीं होती   ...कोई शाप !!
किसी भी मुल्क के लिए
सबसे बड़ी ......त्रासदी !!
गरीबी भुला देती     ..इंसानियत को .....
तिनके तिनके में बाँट देती ....ईमानदारी को .....
गरीबी में सोचने की शक्ति हो जाती है ख़त्म ....
पेट की भूख कर देती है ...इंसान को मजबूर !!
गरीब कष्टपूर्ण जिन्दगी .................जीने को मजबूर !!
लाचार और बेबस .....गरीब आदमी !
उनकी आँखों में बेबसी के आँसू !
पेट की भूख के लिए घर की इज्जत तक बेचने को बेबस  ...गरीबी !!
सरकार के गोदामों में टनों आनाज सड रहे हैं
दूसरी ओर अनाज के अभाव में भूखी जनता दम तोड़ रही है
एक एक आनाज के दाने के लिए तड़पते गरीब
गड्ढे में फेके पतल चाटने को लाचार- भूख !!
जूठे पतल के लिए एक दूसरे से लड़ते ...भूखा इंसान !!
पेट की ज्वाला शांत करने को बैचेन गरीब
एक गरीब माँ के आँख में बेबसी के आँसू ....
जब अपने बच्चों को भूख से तड़पकर रोते देखती है   ... !!
गरीबी करती मानवता को शर्मसार   !!
प्रशासन चुपचाप देख रही है .....अपनी विफलताओं का खेल !
सरकार देख कर चुप है  ......... अपनी शासन की असफलताओं का खेल !
देश समाज सब है ...... मौन क्यों ??
कब मिलेगा गरीबों को पेट भर भोजन ???
आखिर कब इस दरिद्रता से हमारे देश को मुक्ति मिलेगी...???

                                                                                        रंजना वर्मा